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हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम

जीवन के कई मोड़ पर हमें ऐसा लगता है कि जिंदगी अब खत्म सी हो गयी है। हम इतने हताश और निराश हो जाते हैं कि लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं है। फिर हम अपना विवेक खोने लगते हैं। कई तो इस समय में सारा दोष भगवान को ही देने लगते हैं। लेकिन दरअसल वह जिंदगी का अंत नहीं होता। अंत होता है हमारी सोचने समझने की शक्ति का। ऐसे समय में हमें भगवान पर भरोसा करके समस्या के मूल को पहचान कर उसके निदान पर कर्म न करने की आवश्यकता होती है। लेकिन हम में से कई लोग उसके लिए भी दूसरों का सहारा ढूंढ़ते हैं। याद रखिये आपके 1-2 बार प्रयास करने से यदि लक्ष्य हासिल नहीं हो रहा तो आपको और मेहनत और लगन के साथ लक्ष्य प्राप्ति में जुटना है। इसका इतिहास गवाह है जब पृथ्वीराज चौहान से बार-2 पराजित होकर मोहम्मद गोरी एक गुफा में छिपा था। तो उसने देखा कि एक मकड़ी दीवार पर चढ़ने का प्रयास कर रही है। लेकिन वो बार-2 नीचे गिर जाती है। मोहम्मद गोरी की तब आँखें चमचमा उठीं जब उसने देखा कि कई बार प्रयास करने पर आखिर मकड़ी दीवार पर चढ़ने में सफल हो गई। उसे भी यही युक्ति अपने मामले में समझ आयी। 17 बार हारने के बाद मोहम्मद गोरी आखिर सफल हुआ।
इसीलिए हमें हर छोटी घटना पर बिना विचार किये हार नहीं मान लेनी चाहिए। ईश्वर को याद रखते हुए हमें अपना कर्म करना चाहिए। तभी तो कहा जाता है 'हारिये न हिम्मत, बिसारिये न राम'।

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